परिचय

सरकारें जनता की समस्याओं को हल करने में गत कई दशकों से लगातार नाकाम हो रही हैं। इसका मुख्य कारण है वोटरों के अधिकारों व लोकतंत्र के बारे में सरकारों की आधी अधूरी समझ। क्योंकि चुनावों में वोट देने के अलावा भी मतदाताओं के कुछ अधिकार है। वोटरों के इन अधिकारों को पहचानने और मंजूरी दिलाने के लिए एक राजनैतिक पार्टी की जरूरत है - यह विचार सबसे पहले पार्टी के संस्थापक नीति निर्देशक श्री भरत गान्धी के दिमाग में सन् 1979 में आया। किंतु अराजनैतिक ढ़ंग से काम करने की प्राथमिकता के कारण पार्टी की घोषणा शहीद भगत सिंह के शहादत दिवस 23मार्च, 2003 को मेरठ में विधिवत एक समारोह में किया गया। पार्टी का नाम वोटर पेंशन पार्टी रखा गया था। उस समय आर्थिक आजादी आन्दोलन परिसंघ नामक एक अराजनैतिक संगठन मतदाताओं के सभी अधिकारों को मान्यता दिलाने के लिए मेरठ में काम कर रहा था। यह इसी संगठन के राजनैतिक पार्टी में रुचि रखने वाले लोगों ने वोटर पेंशन पार्टी का गठन किया, किंतु पार्टी को राजनैतिक दल के रूप में पंजीकरण कराने के बजाय परिसंघ के द्वारा संचालित एक संगठन के रूप में चलाने का फैसला किया गया। वोटरों के आर्थिक अधिकार - वोटरशिप का मामला जब भारत की संसद में 137 सांसदों ने सन् 2006 में पेश किया। किंतु सन् 2008 में उस समय की लगभग सभी पार्टियों के अध्यक्षों ने मूक विरोध करते हुए इस विषय पर संसद में बहस नही होने दिया। इससे आहत हो कर 10 साल से काम कर रहे परिसंघ के कार्यकर्ताओं ने राजनैतिक पार्टी की जरूरत और ज्यादा सिद्दत से महसूस किया।

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