राजनीतिक सुधारों का मतलब

1. राजनीतिक सुधार का मतलब है जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कानूनों और संविधानों का सुधार। जनता की अपेक्षाओं में सभी लोगों की अपेक्षाएं शामिल हैं। चाहें वह अमीर हो या गरीब, दक्षिणपंथी हो या वामपंथी, पूंजीवादी हो या साम्यवादी, विकेन्द्रवादी हो या केन्द्रवादी, अतिवादी हो या मध्यमार्गी, आस्तिक हो या नास्तिक, देशी हो या विदेशी, स्वार्थी हो या परमार्थी। लोकतंत्र में इन सबको एक वोट का समान अधिकार प्राप्त होता है, किंतु राज्य की व अर्थव्यवस्था की निर्णय प्रक्रिया में इनकी समान भागीदारी नहीं होती। भागीदारी की न्युनतम समता के लिये राजनीतिक सुधार की जरूरत है।

2. राजनीतिक सुधार का आशय ऐसी चुनाव प्रणाली विकसित करने से है, जिससे बुद्धिमान लोगों के साथ-साथ सज्जन लोगों को राजसत्ता तक पहुंचाना सम्भव हो सके।

3. राजनीतिक सुधार का आशय राजनीतिक पार्टिर्यों का एक ऐसा संविधान विकसित करने से है, जिससे वह पार्टी राजनीतिक सुधारों का काम करने में सक्षम हो।

4. राजनीतिक सुधार का आशय एक ऐसी राजव्यवस्था विकसित करने से है जिससे केवल क्षैतिज प्रभुसत्ता (यथा देशों की प्रभुसत्ताओं) को ही नहीं, मंजिलेदार प्रभुसत्ताओं (यथा विश्व, अर्धविश्व, व चौथाई विश्व) को भी मान्यता मिल सके और राजसत्ता व अर्थसत्ता में उनका हिस्सा मिल सके।.... आदि।

5. राजनीतिक सुधार का आशय सन्युक्त राष्ट्र संघ (UNO) का एक ऐसा संविधान विकसित करने से है, जिससे यह संस्था देशों की तरह विश्व स्तर भी कानून का राज कायम करने का साधन बन सके और उन कामों को करने का साधन बन सके, जो काम करना देशों के अपने अकेले वश की बात नहीं है।

6. राजनीतिक सुधार का आशय दुनिया की न्यायप्रिय अर्थव्यवस्था व राजव्यवस्था को कार्यांवित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौते का मसौदा तैयार करने से है और पूरी दुनिया के लोग उसे अपनाकर कानूनी दर्जा दें, इसके लिए आवश्यक कार्य करने से है।